Monday, 1 September 2025

बाँधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान

 

बाँधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान

प्रस्तावना

मध्य प्रदेश के उमरिया ज़िले में स्थित बाँधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान भारत के सबसे प्रसिद्ध वन्यजीव अभ्यारण्यों में से एक है। "बाघों की धरती" के नाम से प्रसिद्ध यह उद्यान विश्व में सबसे अधिक रॉयल बंगाल टाइगर घनत्व के लिए जाना जाता है। लगभग 105 वर्ग किमी (कोर क्षेत्र) और 1536 वर्ग किमी (बफर क्षेत्र) में फैला यह पार्क जैव विविधता और ऐतिहासिक धरोहर का अनोखा संगम है। यहाँ स्थित प्राचीन बाँधवगढ़ किला इस क्षेत्र की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्ता को दर्शाता है। ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ के अंतर्गत संरक्षण प्रयासों का सफल उदाहरण, बाँधवगढ़ आज प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक धरोहर और पारिस्थितिक संतुलन का प्रतीक है।


वन्यजीव

बाँधवगढ़ अपनी बाघों की आबादी के लिए विशेष प्रसिद्ध है। इसके अतिरिक्त यहाँ कई अन्य मांसाहारी जीव पाए जाते हैं, जैसे तेंदुआ, जंगली कुत्ते (ढोल), लकड़बग्घा, भालू, जंगली बिल्ली और सियार। शाकाहारी जीवों में चीतल, सांभर, भौंकने वाला हिरण, नीलगाय और दुर्लभ चौसिंगा प्रमुख हैं। यहाँ लगभग 250 प्रजातियों के पक्षी पाए जाते हैं, जिनमें मोर, गिद्ध, तोते, चील और कई प्रवासी पक्षी शामिल हैं। अजगर, कोबरा और अन्य कई सरीसृप प्रजातियाँ भी इस उद्यान की जैव विविधता को समृद्ध बनाती हैं।


प्राकृतिक वनस्पति

यह उद्यान उष्णकटिबंधीय नम पर्णपाती क्षेत्र में स्थित है। घाटियों में साल के वृक्ष प्रमुख हैं जबकि ऊँचाई पर मिश्रित पर्णपाती वन पाए जाते हैं। बाँस के झुरमुट भी यहाँ आम हैं। जिन क्षेत्रों से गाँवों का पुनर्वास किया गया, वहाँ आज घास के मैदान विकसित हो गए हैं, जो शाकाहारी जीवों के लिए चरागाह का काम करते हैं। साल के जंगल, घास के मैदान और मिश्रित वनों का यह संगम बाँधवगढ़ को वन्यजीव पर्यटन और पारिस्थितिकी अध्ययन का महत्त्वपूर्ण केंद्र बनाता है।


पर्यटक आकर्षण

  • बाघ सफारी: जीप और हाथी सफारी के माध्यम से पर्यटक बाघों को प्राकृतिक आवास में देखने का रोमांच अनुभव करते हैं।

  • बाँधवगढ़ किला: 2000 वर्ष पुराना यह किला रामायण की कथाओं से जुड़ा हुआ है और ऐतिहासिक महत्व रखता है।

  • शेष शैया: 10वीं शताब्दी की भगवान विष्णु की विशाल प्रतिमा, जो सर्प पर शयन मुद्रा में है, चारों ओर प्राकृतिक झरनों से घिरी हुई है।

  • बड़ी गुफा: पहली शताब्दी ईस्वी की चट्टानों को काटकर बनाई गई गुफाएँ, जो प्राचीन मानव निवास का प्रमाण हैं।

  • पक्षी दर्शन: पक्षी प्रेमियों के लिए विशेष पगडंडियाँ और दृष्टि स्थल बनाए गए हैं।

  • ताला ज़ोन: उद्यान का सबसे सुंदर और लोकप्रिय क्षेत्र, जहाँ पहाड़ियाँ, घास के मैदान और घने जंगल पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।


कैसे पहुँचे

  • वायु मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा जबलपुर (160 किमी) है, इसके अलावा खजुराहो (250 किमी) से भी पहुँचा जा सकता है।

  • रेल मार्ग: निकटतम रेलवे स्टेशन उमरिया (32 किमी) और कटनी (100 किमी) हैं, जो प्रमुख शहरों से जुड़े हुए हैं।

  • सड़क मार्ग: जबलपुर, उमरिया, कटनी और खजुराहो से नियमित बसें और टैक्सी सेवाएँ उपलब्ध हैं। राष्ट्रीय राजमार्गों से यह उद्यान आसानी से पहुँचा जा सकता है।


निष्कर्ष

बाँधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान केवल एक वन्यजीव अभ्यारण्य ही नहीं, बल्कि एक सम्पूर्ण पर्यटन गंतव्य है जहाँ प्रकृति, इतिहास और संस्कृति एक साथ जीवंत होते हैं। बाघों की घनी आबादी इसे विश्व पटल पर प्रसिद्ध बनाती है, वहीं प्राचीन किले और मूर्तियाँ भारतीय इतिहास की गाथा सुनाती हैं। पर्यटन छात्रों के लिए बाँधवगढ़ वन्यजीव पर्यटन, धरोहर संरक्षण और सतत विकास का उत्कृष्ट अध्ययन स्थल है। यहाँ की यात्रा न केवल रोमांचक अनुभव देती है, बल्कि यह भी सिखाती है कि कैसे प्राकृतिक और सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण करते हुए जिम्मेदार पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सकता है।

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